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एनटीए के खिलाफ शिमला में एसएफआई का प्रदर्शन, दीं गिरफ्तारियां

एनटीए के विरोध में एसएफआई ने शिमला के स्कैंडल प्वाइंट पर किया प्रदर्शन, दीं सामूहिक गिरफ्तारियां

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हुई धक्का-मुक्की, कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया

एनटीए को भंग करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान


स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने गुरुवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली के खिलाफ शिमला के प्रतिबंधित स्कैंडल प्वाइंट पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक गिरफ्तारियां देकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

प्रदर्शन के दौरान एसएफआई के कार्यकर्ता मालरोड पर बैठ गए और केंद्र सरकार तथा एनटीए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद कई कार्यकर्ताओं को जबरन उठाकर हिरासत में लिया गया।

एसएफआई ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में लगातार विफल साबित हुई है, जिसके कारण देशभर के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। संगठन का कहना है कि नीट-यूजी पेपर लीक, यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने और सीयूईटी समेत विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एसएफआई हिमाचल प्रदेश के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और राज्य सचिव सनी सेक्टा ने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, तकनीकी खामियों और परीक्षाओं के रद्द होने की घटनाओं के बावजूद केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय जवाबदेही तय करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन अव्यवस्थाओं का सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है, जिनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

एसएफआई नेताओं ने कहा कि यूजीसी-नेट 2024 परीक्षा को आयोजित होने के एक दिन बाद रद्द करना पड़ा था, जिससे लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे। संगठन का दावा है कि पिछले एक दशक में देशभर में दर्जनों पेपर लीक और पुनर्परीक्षाओं की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने छात्रों के बीच असुरक्षा और अविश्वास का माहौल पैदा किया है।

संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को समाप्त करने, परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को समाप्त करने, परीक्षा घोटालों की स्वतंत्र न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।

एसएफआई ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। संगठन के अनुसार 19 जून को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय की ओर प्रस्तावित मार्च में हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाग लेंगे और अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे। संगठन का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।